विदर्भ: जानिए इस क्षेत्र की खासियत, चुनौतियाँ और ताजा खबरें
विदर्भ एक ऐसा क्षेत्र है जो विदर्भ, महाराष्ट्र का एक प्रमुख भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्र, जो कृषि पर निर्भर है लेकिन लगातार सूखे और आर्थिक संकट से जूझ रहा है के नाम से जाना जाता है। यहाँ की जमीन उपजाऊ है, लेकिन पानी की कमी ने इसे दर्द का केंद्र बना दिया है। यहाँ के किसान अक्सर अपनी फसलों को बचाने के लिए जंगलों में घुस जाते हैं, और कई बार बरसात का इंतज़ार करते रह जाते हैं। विदर्भ के लोगों की जिंदगी बहुत सीधी है — उनका दिन खेतों से शुरू होता है और बारिश के आशे में खत्म होता है।
यहाँ की आबादी बढ़ रही है, लेकिन रोजगार के अवसर नहीं। कृषि, विदर्भ की आर्थिक आधारशिला, जिस पर लगभग 70% आबादी निर्भर है, लेकिन इसकी उत्पादकता बारिश पर टिकी है ने अपनी पहचान बनाई है, लेकिन इसकी तकनीकी और बाजार सुविधाएँ पीछे रह गई हैं। बारिश नहीं हुई तो बीज बेचने के लिए बैंक लोन लेना पड़ता है, और जब फसल बर्बाद हो जाती है, तो ऋण चुकाने का दबाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि विदर्भ में किसान आत्महत्याओं की खबरें लगातार आती रहती हैं।
सूखा, विदर्भ की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा, जो हर दूसरे साल इस क्षेत्र को छू जाती है और जल संसाधनों को सूखे में बदल देती है ने यहाँ के नदियों, तालाबों और कुओं को बर्बाद कर दिया है। लोग अब दूर-दूर तक पानी के लिए जाते हैं। सरकारी योजनाएँ चलती हैं, लेकिन उनका असर जमीन तक नहीं पहुँच पाता। विदर्भ में अभी भी बहुत से गाँव बिजली और सड़कों के बिना हैं। लेकिन यहाँ के लोग हार नहीं मानते। वे नए तरीकों से खेती करने की कोशिश कर रहे हैं — जैविक खेती, जल संरक्षण और छोटे बाजारों को जोड़ने के लिए स्वयं सहायता समूह बना रहे हैं।
इस विषय पर आपको यहाँ ऐसी खबरें मिलेंगी जो सिर्फ रिपोर्ट नहीं, बल्कि जिंदगी की कहानियाँ हैं। विदर्भ के किसानों की लड़ाई, बारिश के इंतज़ार में बिताए दिन, बरसात के बाद खुशियाँ, और उन लोगों की कहानियाँ जो इस क्षेत्र को बदलने की कोशिश कर रहे हैं — सब कुछ यहाँ है। आप यहाँ से विदर्भ के असली चेहरे को जान पाएंगे — न केवल आँकड़ों से, बल्कि उन लोगों के दिलों से, जो यहाँ रहते हैं।
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नव॰
चंद्रपुरमध्ये 45.6 डिग्री सेल्सियसचा रेकॉर्ड तापमान नोंदवला गेला, जे सामान्यापेक्षा 3.6 डिग्री जास्त आहे. विदर्भातील उष्णता वाढत आहे, ज्यामुळे आरोग्य आणि शेतीवर धोका निर्माण झाला आहे.