उष्णता: भारत में गर्मी के प्रभाव, चेतावनियाँ और लोगों पर असर
जब बात आती है उष्णता, वातावरण में तापमान का असामान्य रूप से बढ़ना और इसके साथ आने वाली मौसमी अस्थिरता की, तो भारत के कई हिस्से इसके सबसे ज्यादा ग्रास होते हैं। ये उष्णता केवल गर्मी का नाम नहीं, बल्कि बाढ़, चक्रवात, ओले और अचानक बारिश का कारण बन जाती है। जब उष्णता का स्तर बढ़ता है, तो यह मौसम विभाग, भारत की मौसमी गतिविधियों को ट्रैक करने और चेतावनियाँ जारी करने वाली सरकारी एजेंसी को ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी करने के लिए मजबूर कर देती है।
उत्तर भारत में जब ठंड और धुंध का मौसम चल रहा होता है, तो दक्षिण और पूर्वी भारत में उष्णता के कारण बारिश के बादल जम जाते हैं। चक्रवात, एक तेज़ हवाओं वाला घूमता हुआ तूफान जो समुद्र से उठकर तटीय क्षेत्रों पर विनाश लाता है जैसे मोंथा, हिमाचल में ओले और बरसात के साथ आते हैं। बिहार, उत्तर बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ये घटनाएँ सड़कें बंद कर देती हैं, घर बर्बाद कर देती हैं और लोगों की जान ले लेती हैं। ये सब उष्णता के एक ही चक्र का हिस्सा हैं — जिसमें गर्मी नदियों को भर देती है, बादल बनाती है, और फिर उन्हें बारिश के रूप में जमीन पर गिरा देती है।
इसी वजह से आपके फ़ीड में आए खबरें — जैसे हिमाचल में ऑरेंज अलर्ट, बिहार में बाढ़ का खतरा, या पंजाब में अज्ञात व्यक्ति की ठंड से मौत — सब एक ही चित्र के अलग-अलग हिस्से हैं। उष्णता बस गर्मी नहीं, ये एक ऐसा जीवन-मरण का खेल है जो हर साल नए नए रूप में आता है। यहाँ आपको ऐसी ही ताज़ा और सटीक खबरें मिलेंगी, जो आपको बताएँगी कि कहाँ और क्यों ये उष्णता का असर सबसे ज्यादा हो रहा है।
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नव॰
चंद्रपुरमध्ये 45.6 डिग्री सेल्सियसचा रेकॉर्ड तापमान नोंदवला गेला, जे सामान्यापेक्षा 3.6 डिग्री जास्त आहे. विदर्भातील उष्णता वाढत आहे, ज्यामुळे आरोग्य आणि शेतीवर धोका निर्माण झाला आहे.