कॉर्नियल क्षति — कारण, लक्षण और तात्कालिक उपचार
क्या आंख में अचानक तेज दर्द, बार-बार झपकना या धुंधला दिखना शुरू हो गया है? ये कॉर्निया यानी कॉर्नियल क्षति के संकेत हो सकते हैं। कॉर्निया आंख के सामने वाला पारदर्शी हिस्सा है — अगर यह चोटिल हो जाए तो देखने में बाधा और तेज तकलीफ हो सकती है।
कॉर्नियल क्षति के सामान्य कारण
कॉर्नियल क्षति कई वजह से हो सकती है। सबसे आम कारण हैं: आँख में धूल या रेत का दाखिल होना, उँगली या किसी नुकीली वस्तु से खरोंच, रसायनों की छींट, तेज यूवी (उदाहरण: वेल्डिंग बिना चश्मे के), और संक्रमण जैसे बैक्टीरिया या वायरस। कुछ बार कॉन्टैक्ट लेंस की गलत आदतें (लंबे समय तक पहनना, साफ न रखना) भी कॉर्निया को नुकसान पहुँचाती हैं।
ध्यान रहे: हल्की सी झनझनाहट भी नजरअंदाज़ न करें। छोटी-सी चोट आगे चलकर अल्सर या गंभीर संक्रमण बन सकती है।
लक्षण, तात्कालिक कदम और कब डॉक्टर दिखाएँ
लक्षण जल्दी पहचान लें तो समस्या बढ़ने से रोकी जा सकती है। सामान्य लक्षण हैं तेज दर्द, आँख में लालिमा, लगातार पानी आना, रोशनी में चमक से दर्द, धुंधला दिखना या किसी चीज़ की परत जैसा लगना।
क्या करें अभी — आसान और उपयोगी कदम:
- आँख रगड़ें बिल्कुल न। रगड़ने से चोट बढ़ सकती है।
- अगर रेत/धूल है तो स्वच्छ पानी से धीरे-धीरे फ्लश करें।
- रासायनिक छींटें हों तो कम से कम 15-20 मिनट पानी से धोएं और तुरंत डॉक्टर दिखाएँ।
- कॉन्टैक्ट लेंस तुरंत निकाल दें।
- तेज दर्द, रोशनी में बहुत संवेदनशीलता, या दृष्टि में भारी बदलाव हों तो तुरंत आँख के डॉक्टर (ophthalmologist) के पास जाएँ।
डॉक्टर क्या कर सकते हैं: नेत्र विशेषज्ञ नेमोनिक इम्पैक्ट की जांच करेंगे, फ्लोरेसिन टेस्ट से खरोंच दिखाते हैं, और जरुरत मुताबिक एंटीबायोटिक या एंटीवायरल ड्रॉप देंगे। कुछ मामलों में बैंडेज कॉन्टैक्ट लेंस, दर्द निवारक या सर्जरी तक की आवश्यकता हो सकती है।
रोकथाम भी आसान है: मनोरंजन या काम के दौरान सुरक्षा चश्मा पहनें, कॉन्टैक्ट लेंस की हाइजीन बनाए रखें, रसायनों से सावधानी बरतें और आँख में कुछ लगे तो घरेलू नुस्खों से छेड़छाड़ न करें।
अगर आप सुनिश्चित नहीं हैं कि चोट कितनी गंभीर है, तो टालने की बजाय जल्द से जल्द नेत्र विशेषज्ञ से मिलें। आँख छोटी लग सकती है, पर सही समय पर इलाज न मिलने पर नुकसान लंबा और स्थायी हो सकता है।