मुशफिकुर रहीम ने 6 मार्च, 2025 को फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए ओडीआई क्रिकेट से सेवानिवृत्ति की घोषणा कर दी। यह घोषणा बांग्लादेश की आईसीसी मेन्स चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के ठीक एक हफ्ते बाद आई, जहां टीम ने पांच मैचों में से कोई भी मैच नहीं जीता। 37 साल के रहीम ने 274 ओडीआई मैचों में 7,795 रन बनाए, जिससे वह बांग्लादेश के सबसे अधिक खेल चुके ओडीआई खिलाड़ी और दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए। एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में, वह दुनिया के केवल पांच खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने 250 से अधिक ओडीआई मैच खेले हैं। उनके सात शतक विकेटकीपर्स के बीच चौथे सबसे ज्यादा हैं, कुमार संगकारा, एडम गिलक्रिस्ट और एमएस धोनी के बाद।
"मैंने हर मैच में 100% दिया"
रहीम के फेसबुक पोस्ट में लिखा था: "आज से मैं ओडीआई फॉर्मेट से सेवानिवृत्त हो रहा हूं। अलहमदुलिल्लाह, हर चीज के लिए। वैश्विक स्तर पर हमारी उपलब्धियां सीमित रहीं, लेकिन एक बात निश्चित है—जब भी मैं अपने देश के लिए मैदान पर उतरा, मैंने देश के लिए 100% से ज्यादा दिया।" उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और फैन्स को धन्यवाद दिया, जिनके लिए उन्होंने 19 साल तक क्रिकेट खेला। यह भावनात्मक घोषणा उनके करियर की गहराई को दर्शाती है—एक ऐसा खिलाड़ी जिसने दर्द, आलोचना और चोटों के बावजूद कभी हार नहीं मानी।
2007 विश्व कप से लेकर चैम्पियंस ट्रॉफी तक का सफर
रहीम का अंतरराष्ट्रीय करियार 2005 में शुरू हुआ, लेकिन वास्तविक ब्रेकथ्रू 2007 के विश्व कप में आया, जब उन्होंने भारत के खिलाफ 56 अपराजित रन बनाए और बांग्लादेश को इतिहास रचने में मदद की। उस मैच के बाद केलेड मशूद की जगह वह टीम का स्थायी विकेटकीपर बन गए। उन्होंने 2010 से 2016 तक 92 लगातार ओडीआई मैच खेले—एक रिकॉर्ड जो अभी तक किसी ने नहीं तोड़ा। उनका आखिरी अर्धशतक 20 अप्रैल, 2024 को श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में आया। लेकिन आखिरी कुछ सालों में उनकी फॉर्म में गिरावट आई, और चोटों ने उनकी गतिविधि को और प्रभावित किया।
एक युग का अंत: महमूदुल्लाह रियाद की भी सेवानिवृत्ति
रहीम के एक हफ्ते बाद, उनके भांजे और बांग्लादेश के अनुभवी ऑलराउंडर महमूदुल्लाह रियाद ने भी 13 मार्च, 2025 को ओडीआई से सेवानिवृत्ति की घोषणा की। 39 साल के रियाद ने 159 मैचों में 5,689 रन बनाए, जिनमें चार शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं। उनके सभी चार शतक आईसीसी टूर्नामेंट्स में आए—2015 विश्व कप में दो, 2017 चैम्पियंस ट्रॉफी में न्यूजीलैंड के खिलाफ, और 2023 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ। रियाद ने पहले 2021 में टेस्ट और 2024 में टी20आई से सेवानिवृत्ति कर ली थी। अब दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों के चले जाने से बांग्लादेश क्रिकेट का एक पूरा युग समाप्त हो गया है।
क्यों अभी? टीम का नया मोड़
इन सेवानिवृत्तियों का समय बांग्लादेश क्रिकेट के लिए एक अहम मोड़ है। चैम्पियंस ट्रॉफी में बिना जीत के बाहर होने के बाद, टीम के नेतृत्व ने नए खिलाड़ियों को अवसर देने का फैसला किया। ऐसा नहीं है कि ये खिलाड़ी बिना कारण चले गए। रहीम की फॉर्म में गिरावट, रियाद की उम्र और टीम की नवीनीकरण की जरूरत ने इन निर्णयों को अनिवार्य बना दिया। यह बदलाव पहले भी देखा गया था—कप्तान तमीम इकबाल ने जनवरी 2025 में सेवानिवृत्ति की घोषणा की थी, लेकिन एक दिन बाद उन्होंने यह फैसला वापस ले लिया। उन्होंने बाद में केवल दो ओडीआई खेले और फिर स्थायी रूप से सेवानिवृत्त हो गए।
शकीब का अनिश्चित भविष्य और नए नेतृत्व की आवश्यकता
इस बीच, टीम के अन्य वरिष्ठ खिलाड़ी शकीब अल हसन अभी भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हैं, लेकिन उनका भविष्य अनिश्चित है। उन्होंने अक्टूबर 2024 में भारत के दौरे के दौरान सेवानिवृत्ति की घोषणा की थी, लेकिन बांग्लादेश लौटने से पहले सुरक्षा चिंताओं के कारण वे अभी तक देश नहीं लौट पाए। इस स्थिति में, टीम को नए नेतृत्व की जरूरत है—कोई ऐसा व्यक्ति जो न सिर्फ टीम को नेतृत्व दे, बल्कि नए खिलाड़ियों को प्रेरित कर सके।
रहीम का टेस्ट क्रिकेट में अभी भी जारी करियर
रहीम ने टेस्ट क्रिकेट में अभी भी खेलने का इरादा जताया है। वह 94 टेस्ट मैच खेल चुके हैं और 100 टेस्ट मैच खेलने का लक्ष्य रखे हुए हैं। उनके लिए टेस्ट क्रिकेट "खेल का शुद्धतम रूप" है, और वह इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए तैयार हैं। उनके टेस्ट करियर का अंत तब होगा जब वह इस सीमा को पार कर लेंगे। इस तरह, रहीम की ओडीआई सेवानिवृत्ति एक अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है।
बांग्लादेश क्रिकेट का नया अध्याय
रहीम और रियाद के चले जाने के बाद, बांग्लादेश क्रिकेट एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। नए खिलाड़ियों को अवसर मिलेंगे, लेकिन उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी भी है। रहीम जैसे खिलाड़ियों ने बांग्लादेश क्रिकेट को वैश्विक मंच पर खड़ा किया। अब यह जिम्मेदारी युवाओं पर आ गई है—जिन्हें न केवल रन बनाने हैं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी बनाए रखना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुशफिकुर रहीम ने ओडीआई में कितने रन बनाए और कितने मैच खेले?
मुशफिकुर रहीम ने 274 ओडीआई मैचों में 7,795 रन बनाए, जो बांग्लादेश के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। उनका औसत 36.42 था, जिसमें नौ शतक और 49 अर्धशतक शामिल हैं। वह बांग्लादेश के सबसे अधिक खेल चुके ओडीआई खिलाड़ी हैं।
रहीम और महमूदुल्लाह रियाद में क्या संबंध है?
महमूदुल्लाह रियाद मुशफिकुर रहीम के भांजे हैं। दोनों एक ही परिवार से जुड़े हैं और बांग्लादेश क्रिकेट के दो सबसे बड़े नाम हैं। दोनों ने लगभग एक ही समय में अपने करियर की शुरुआत की और आज एक ही समय पर ओडीआई से सेवानिवृत्ति कर दी।
रहीम अभी भी टेस्ट क्रिकेट खेलेंगे?
हां, रहीम टेस्ट क्रिकेट में खेलना जारी रखेंगे। वह अभी तक 94 टेस्ट मैच खेल चुके हैं और 100 टेस्ट मैच पूरे करने का लक्ष्य रखे हुए हैं। उनके लिए टेस्ट क्रिकेट खेल का सबसे शुद्ध रूप है।
बांग्लादेश क्रिकेट टीम अब किस दिशा में जा रही है?
रहीम और रियाद के चले जाने के बाद टीम युवा पीढ़ी की ओर बढ़ रही है। नए खिलाड़ियों को अवसर मिलेंगे, लेकिन उन्हें बड़े खिलाड़ियों के जुड़ाव और निरंतरता को बनाए रखना होगा। टीम को नए नेतृत्व की आवश्यकता है, खासकर शकीब अल हसन के अनिश्चित भविष्य के बाद।
चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में बांग्लादेश की निराशाजनक भूमिका का क्या प्रभाव पड़ा?
चैम्पियंस ट्रॉफी में बिना जीत के बाहर होने ने बांग्लादेश क्रिकेट पर भारी दबाव डाला। इसने वरिष्ठ खिलाड़ियों को अपने करियर के अंत के बारे में सोचने पर मजबूर किया। इस असफलता ने टीम के नवीनीकरण की जरूरत को और भी तेज कर दिया।
क्या शकीब अल हसन अभी भी टीम में वापस आ सकते हैं?
शकीब अल हसन ने 2024 में सेवानिवृत्ति की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक बांग्लादेश लौट नहीं पाए हैं। उनकी सुरक्षा की चिंताओं के कारण उनका भविष्य अनिश्चित है। अगर वे लौटते हैं, तो वे टीम के लिए एक बड़ा नेता बन सकते हैं।
lakshmi shyam
नवंबर 22, 2025 AT 11:01ये सब रोमांचक बातें हैं पर असली सवाल ये है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने इन वरिष्ठ खिलाड़ियों को कभी सही समर्थन दिया ही नहीं। फॉर्म गिरी तो उन्हें बर्बाद कर दिया, अब जब वो चले गए तो उनकी यादें बुलंद कर रहे हो। बेइंतहा बेइमानी।
Sabir Malik
नवंबर 23, 2025 AT 11:40मुशफिकुर की ओडीआई सेवानिवृत्ति एक ऐसा पल है जिसे हम जीवन भर याद रखेंगे। उन्होंने न सिर्फ रन बनाए, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को दिखाया कि लगन, दृढ़ता और देशभक्ति क्या होती है। जब भी वो मैदान पर उतरे, तो लगता था जैसे उनके हर रन में बांग्लादेश का दिल धड़क रहा हो। उनके बिना टीम अधूरी लगेगी, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी। इन दिनों जब हर कोई नए खिलाड़ियों की बात कर रहा है, तो याद रखना चाहिए कि आज के युवाओं के लिए उन्होंने रास्ता बनाया था। एक विकेटकीपर जिसने चोटों, आलोचनाओं और दबाव के बावजूद कभी अपना दिल नहीं हारा।
Debsmita Santra
नवंबर 23, 2025 AT 21:30रहीम का ओडीआई करियर एक ऐसा अध्याय है जिसे इतिहास की किताबों में लिखा जाएगा और उसे बच्चे पढ़ेंगे। उनकी टेस्ट क्रिकेट में जारी रहने की इच्छा बहुत अच्छी बात है क्योंकि टेस्ट खेल वास्तविक आत्मा का परीक्षण है। उनकी शांति, अडिगता और अनुशासन एक नए नेता के लिए मॉडल है। अगर बांग्लादेश क्रिकेट को वास्तविक रूप से आगे बढ़ना है तो इन वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ बातचीत जारी रखनी होगी। उनके अनुभव बिना नए खिलाड़ियों के लिए एक जीवित गाइड हैं। इस बदलाव को सिर्फ एक टूर्नामेंट की निराशा के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि एक जन्म के रूप में।
Shashi Singh
नवंबर 24, 2025 AT 19:18ये सब बकवास है!! ये सब फेक न्यूज है!! क्या तुम्हें पता है कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने इन दोनों को फोर्स किया है सेवानिवृत्त होने के लिए?? और शकीब को बांग्लादेश से बाहर रखा गया है क्योंकि वो बड़े बॉस के खिलाफ बोल रहे थे!! ये एक बड़ा षड़यंत्र है!! वो खिलाड़ी जो टीम को जीत पर ले जाते थे, उन्हें हटा दिया गया!! अब बच्चों को खेलने दो ताकि वो फिर से गिर जाएं!! इस बार वो नहीं बचा पाएंगे!!
Vikash Kumar
नवंबर 26, 2025 AT 05:09मुशफिकुर के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बर्बाद हो गया। अब कोई नहीं बचा।
Siddharth Gupta
नवंबर 26, 2025 AT 23:14देखो ये जो बात हो रही है वो तो बहुत बड़ी है। दो ऐसे खिलाड़ी जिन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इस टीम के लिए दे दिया, अब एक साथ चले गए। लेकिन अब ये नए लोग जो आ रहे हैं, उन्हें बस याद रखना है कि इस टीम को बनाने वाले ये लोग थे। बस एक बार उनके मैच देख लो, फिर तुम्हें पता चल जाएगा कि ये जो अब खेल रहे हैं वो किस लेवल पर हैं। अगर ये नए बच्चे थोड़ा भी उनकी लगन को समझ लें तो बांग्लादेश क्रिकेट का भविष्य अभी भी रोशन है।
Anoop Singh
नवंबर 27, 2025 AT 20:22मुशफिकुर के भांजे ने भी चले गए? तो ये तो बस फैमिली टीम थी। अब बाकी कौन खेलेगा? क्या शकीब भी चला जाएगा? अगर तीनों चले गए तो टीम में कौन बचा? बस एक लड़का है जिसने एक बार 20 रन बनाए थे।
Omkar Salunkhe
नवंबर 29, 2025 AT 07:36रहीम के 7795 रन? ओह बस ये तो बहुत है ना? लेकिन उनका औसत 36 है और उन्होंने 274 मैच खेले तो ये तो बस लंबे समय तक खेल गए बस, कुछ बड़ा नहीं। और शकीब ने सेवानिवृत्ति की तो उन्हें वापस बुलाने के लिए अभी भी एक बड़ा बेंच पर बैठा है। ये सब बकवास है।
raja kumar
नवंबर 30, 2025 AT 14:32मुशफिकुर के जैसे खिलाड़ी आने में सौ साल लग जाते हैं। उन्होंने बांग्लादेश क्रिकेट को वैश्विक मानचित्र पर खड़ा किया। उनकी शांति, उनकी लगन, उनकी आत्मविश्वास की कमी नहीं थी। ये नए खिलाड़ी जो आ रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि खेल का मतलब सिर्फ रन बनाना नहीं है। ये एक भावना है। और जिसने इस भावना को समझा, वो अमर है।
Sumit Prakash Gupta
दिसंबर 1, 2025 AT 18:35ये सेवानिवृत्ति एक नए नेतृत्व के लिए अवसर है। एक नया रूप आने वाला है। इस बदलाव को बाधा नहीं, बल्कि एक प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए। टीम को अब अपने आधार को मजबूत करना होगा। ये जो लोग आ रहे हैं, उन्हें बस ये बात समझनी है कि विरासत को संजोना है, न कि उसे बदलना।
Bhavesh Makwana
दिसंबर 2, 2025 AT 21:32एक खिलाड़ी की सेवानिवृत्ति एक युग का अंत होती है, लेकिन एक देश के लिए वह युग एक नए अध्याय की शुरुआत भी होता है। रहीम ने जो बनाया, वो बस रन नहीं, वो एक आत्मा थी। अब ये आत्मा नए खिलाड़ियों के दिलों में बसनी चाहिए। खेल बदलता है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने खेला, वो भावना कभी नहीं बदलनी चाहिए।
Vidushi Wahal
दिसंबर 3, 2025 AT 03:12उनकी आखिरी बार जब उन्होंने बल्ला घुमाया, तो लगा जैसे वो अपने दिल को बाहर निकाल रहे थे।
Narinder K
दिसंबर 4, 2025 AT 18:43तो अब शकीब भी चले जाएंगे? और फिर क्या? टीम का नाम ही बदल देंगे? अब तो बस बच्चों का नाम रख दो, और उन्हें बाहर भेज दो।
Narayana Murthy Dasara
दिसंबर 6, 2025 AT 08:16रहीम और रियाद के चले जाने के बाद ये टीम अब अपने अंदर की आवाज़ सुनना शुरू करे। जो लोग आ रहे हैं, उन्हें बस ये बताओ कि खेल क्यों खेला जाता है। बस इतना। बाकी सब अपने आप आ जाएगा।
Vasudha Kamra
दिसंबर 7, 2025 AT 07:28मुशफिकुर के लिए एक बहुत बड़ा अभिनंदन। उन्होंने जो किया, वो बहुत कम लोग कर पाते हैं। उनकी लगन और अडिगता को देखकर लगता है कि वो खेल नहीं, बल्कि जीवन जी रहे थे। उनके बिना बांग्लादेश क्रिकेट का एक अहम हिस्सा चला गया, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
Abhinav Rawat
दिसंबर 8, 2025 AT 12:01क्या ये सिर्फ एक खिलाड़ी की सेवानिवृत्ति है? या ये एक समाज की भावनात्मक अवस्था का प्रतिबिंब है? जब हम एक व्यक्ति को बाहर निकाल देते हैं, तो हम अपने आप को भी खो देते हैं। रहीम ने बांग्लादेश के लिए खेला, लेकिन क्या बांग्लादेश ने उन्हें वैसा ही सम्मान दिया जिसके लायक वो थे? शायद नहीं। और अब जब वो चले गए, तो हमें अपने अंदर एक खालीपन महसूस हो रहा है। ये खेल का अंत नहीं, ये हमारे अपने अंदर के एक भाग का अंत है।